धान नवाखानी मिलनसमाहरोह के अवसर पर त्यौहार धुरवा आदिवासी समुदाय का उत्सव नहीं अपितु सांस्कृतिक विरासत को हस्तांतरण, धुरवा समाज


आईएनसी 24 मीडिया छत्तीसगढ़। बस्तर, दरभा तहसील रिपोटर - भगत बघेल की रिपोर्ट : -


बस्तर। प्राकृतिक के गोद मे बसा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान मे आने वाले गॉव कावापल तहसील नानगुर बस्तर में संभागीय धुरवा समाज का नवा खानी तियार, मिलन समाहरोह कार्यक्रम बड़े धूम धाम के साथ बनाया गया। बस्तर संभाग के सभी जिलों से आये, 69 क्षेत्रों के लोग सम्मिलित हुए। धुरवा समाज के इस कार्यक्रम मे जिला बस्तर, सुकमा, दन्तेवाड़ा, बिजापुर उड़ीसा से भी धुरवा जनजाति के लोग सांस्कृतिक नाचा दल के साथ बड़ी संख्या मे आये हुए थे।


आये हुए मेहमानों का पैर दुलाकर एवं हल्दी चावल का ठिका लगाकर स्वागत किया गया। आधुनिक युग मे समाज के युवा अपनी संस्कृति, बोली भाषा, भेष भूषा, रीति नीति, परम्परा को बनाये रखें है और गर्ववांभित परम्परा को आने वाले समय पर धुरवा आदिवासी समुदाय को संजोकर रखेंगे। इन्ही परम्परा पहचान को बनाये रखने के उद्देश्य से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम - कावापल, तिरिया, गुमलवाड़ा, कालागुडा, तोलावाड़ा गॉव को संभागीय धुरवा समाज बस्तर की ओर से नवा खानी जुहार भेंट, मिलन समाहरोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जो अत्यंत ही सहरानीय रूप से सम्पन्न हुआ।


कार्यक्रम का शुभारम्भ गॉव गोसिन माय जलनी आया, मावली आया, अमर शहीद वीर गुडांधुर, वीर ढेबरी धूर की सेवा अर्जी देकर किया गया। समाज प्रमुखो के द्वारा धुरवा समाज भवन का भूमि पूजन किया गया। हर क्षेत्र से आये हुए नाइक, पाइक का स्वागत पगड़ी बांध कर व मऊआ फूल की माला पहना कर किया गया। नाइक पाइक ही अपने अपने गॉव के न्याय पालिका होते हैं। इन्ही के द्वारा गॉव मे सामाजिक रुढ़ीगत न्याय व्यवस्था का संचालन किया जाता है। समाज के नियमों का पालन करना, नियमों, परम्परा के उल्लंघन करने पर दंड व जुर्माना जैसे विधाओं से लोगों को एक सूत्र मे रखते हैं।


आदिवासी समुदाय को मिलने वाली  संवैधानिक अधिकारों पर प्रकाश डाला। समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वालों को व शासकीय उच्च पद मे नव नियुक्त समाज से, का भी धुरवा तुआल का पगड़ी बांध कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात सभी को हल्दी चावल का ठिका लगाकर, नया धान से तैयार चावल का प्रसाद से एक दूसरे को ठिका लगाकर जुहार भेंट किये।


धुरवा आदिवासी समाज के द्वारा  वेशभुषा, बोली, रीति नीति व नेंग नीति पारंपरिक त्यौहार माठी तियार (आमा नवा), अमुस तियार, धान नवा तियार, दियारी तियार को पीढ़ीदर पीढ़ी हस्तांतिरत करने के लिये शपथ लिया गया। इस अवसर पर समाज प्रमुखों सहित हजारों की संख्या में  धुरवा आदिवासी समुदाय उपस्थित रही।






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