बस्तर ब्रेकिंग न्यूज़ - बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा भाजपा शासन काल मे आदिवासी बच्चे सुरक्षित नहीं


 

आईएनसी 24 मीडिया छत्तीसगढ़। जगदलपुर बस्तर रिपोर्टर - सुमित बाजपेई की रिपोर्ट : -


बस्तर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा है, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद आदिवासी छात्र-छात्राओं पर अत्याचार-अनाचार के बढ़ते मामले एक बार फिर से झलियामारी युग की ओर लेकर जा रहे हैं, यह गंभीर चिंतन का विषय है कि आश्रम-छात्रावासों में आदिवासी छात्राएं गर्भवती हो रही हैं।


छात्रों की फांसी लगाकर संदिग्ध मौत हो रही है, फूड पाइजनिंग से बच्चों की जान पर बन आ रही है, छात्रावास अधीक्षक छात्रावास में नहीं रहते इस तरह के गंभीर मामलों पर कठोर कार्रवाई न कर प्रशासन और भाजपा के जनप्रतिनिधि ऐसे मामलों की मुक्कमल जांच न कर आनन फानन में प्रकरणों को दबाने में लगे हुए हैं।


बघेल ने कहा कि क्या यह भाजपा का सुशासन है जिसके बड़े बड़े वायदे कर भाजपा सत्ता में लौटी है यह भाजपा की नजर बस्तर और सरगुजा संभाग के खनिज और वन संपदाओं पर है जिसके लिए भाजपा नहीं चाहती की आदिवासी छात्र पढ़ें और आगे बढ़े तथा भविष्य में अपने हक़ की लड़ाई लड़ सकें जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तब अमन, चैन और शांति थी पर अब 9 महीने में बस्तर अशांत हो गया है।


जिसके लिए बस्तर में युद्ध जैसे हालात उत्पन्न किए जा रहे हैं। बस्तर विधायक श्लखेश्वर बघेल ने कहा की बालक छात्रावास गुढरा मे बीते दिनों में एक घटना घटी छात्र पढ़ाई कर रहे थे इस दौरान छत ऊपर गिरने की वजह से दो छात्र घायल भी हो गए आश्रम-छात्रावास एवं स्कूल भवन इतना जर्ज़र होने के बाद भी प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान आकर्षण ही नहीं हो रहा हैं।


पूर्वत में हमारी सरकार द्वारा छात्रों के द्वारा संभागीय स्तरीय छात्र सम्मेलन जगदलपुर में रखा गया था। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष छात्रों ने प्री. मेट्रिक एवं पोस्ट मेट्रिक में भोजन सहाय की राशि बढ़ाने की मांग रखी थी, जिसको भूपेश बघेल तुरंत निराकरण करते हुए प्री. मेट्रिक में एक हजार से बढ़ाकर पंद्रह सौ किया था।


वहीं पोस्ट मेट्रिक में सात सौ से बढ़ाकर बारह सौ रूपये बढ़ाया गया था, लेकिन वर्तमान में भोजन सहाय की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रही है, धरमपूरा एकलव्य आवासीय विद्यालय में 50-60 बच्चे फूडपोइजिन के शिकार हुए प्रशासन आखिर इतनी लापरवाही बच्चों के साथ क्यों कर रहीय है।



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